मे कभी एक घर था, आज एक खंडर हु
यादो मे उल्झा हुआ, सिर्फ एक बवंदर हु!
दादा ने मुझे बनाया, बेटे ने सीचा था
सामने एक व्हरांडा और छोटा सा बगीचा था,
बगीचा सुख गया,और दादा का पोता भी किस्सी दुर जहान है
मे कभी एक घर था, और अब एक खंडर हु!
यादो मे उल्झा हुआ, सिर्फ एक बवंदर हु!
एक माँ ने मुझे मकान से घर बनया,
बहू ने समजदारी भरी, बच्चो ने नादान शेतानी,
माँ और बहू कही खो गये है, और बच्चे तो अब बडे हो गये है
मे कभी एक घर था, और अब एक खंडर हु!
यादो मे उल्झा हुआ, सिर्फ एक बवंदर हु!
मैने दिवाली देखी, और देखा है मातम भी,
देखी है कडी धूप, और बरस्ता पानी भी,
धूप भी गयी, पानी भी सुखं गया, रंग बदले मौसम ने भी कयी
मे कभी एक घर था, और अब एक खंडर हु!
यादो मे उल्झा हुआ, सिर्फ एक बवंदर हु!
कही मशिनो कि आवाझ आ राही है, कही crane झूल रहे है, कही ट्रक दौड रहे है,
शेहेर कि सुरत जैसे बदल रहे है, उमीद कि येही किरण दिखा रहे है,
कि कभी मे एक खंडर था,
अब फिर एक घर बनूँगा!!!
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